Oriental studies

The Department has three centres.

  • Centre for Life Management (Established in 2002, formerly known as Art of Living)
  • Centre for Theology (Established in 2003)
  • Centre for Scientific Spirituality Studies (Established in 2007)
  • Center for Music (Established in 2014)

Life Management

जीवन प्रबन्धन का अर्थ जीवन में अन्तनिर्हित संभावनाओं, क्षमताओं की परख, उनका विकास एवं सुनियोजन है। प्रबन्धन के इसी अर्थ में जीवन की सफलता के समस्त सूत्र समाये हुए हैं। जीवन प्रबन्धन के दो महत्वपूर्ण पक्ष है- प्रथम जीवन दृष्टि और दूसरा जीवन शैली। जीवन दृष्टि के द्वारा व्यक्ति स्वयं के व्यक्तित्व के क्षमताओं और संभावनाओं की समझ प्राप्त करता है और परिवेश के सन्दर्भ में अपना मूल्याकंन भी करता है तथा जीवन शैली में व्यक्ति का लक्ष्य एवं आदर्श अभिव्यक्त होता है। बिना कोई लक्ष्य के जीवन शैली निरर्थक है और बिना जीवन दृष्टि के सार्थक लक्ष्य का चयन असम्भव है। सही अर्थों में यही जीवन प्रबन्धन के मौलिक आधार भी हैं।

विद्यार्थी जीवन, मानवीय जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और अत्यन्त संवेदनशील अवस्था है। यहां सीखने, समझने और संभलने की सर्वाधिक आवश्यकता महसूस की जाती है। इसके लिए जीवन प्रबन्धन ही एक समर्थ उपाय हो सकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए परम् आदरणीय प्रो. जितेन्द्र तिवारी जी द्वारा जीवन जीने की कला के रूप में वर्ष 2002 से इस विभाग की शुरुआत हुई। अनिवार्य विषय के रूप में सभी स्तर के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया। वर्ष 2005 से इस विषय का नामान्तर जीवन प्रबन्धन के रूप में विश्वविद्यालय के आधारभूत पाठ्यक्रम और अनिवार्य विषय के रूप में किया गया जो मूल्यपरक शिक्षा की दिशा में देव संस्कृति विश्वविद्यालय की अद्वितीय पहल है।

पाठ्यक्रम की मौलिक विशेषताएं:-

  • स्वयं कुलाधिपति महोदय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में जीवन प्रबन्धन विभाग द्वारा इस विषय का संचालन होता है।
  • ध्यान, गीता एवं नवरात्र की विशेष कक्षाओं के माध्यम से स्वयं श्रद्धेय कुलाधिपति महोदय द्वारा विद्यार्थियों को आदर्श जीवन सूत्रों का शिक्षण एवं समर्थ मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • विभागाध्यक्ष एवं इस विषय के सूत्रधार परम आदरणीय प्रो. जितेन्द्र तिवारी जी की अतिविशिष्ट कक्षाओं में विद्यार्थियों को जीवन प्रबन्धन के मूलभूत पहलुओं एवं सिद्धांतों का व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
  • अलग-अलग कक्षाओं में पाठ्यक्रम के अनुरूप अध्यापन कार्य आदर्श व्यक्तित्व संपन्न विश्वविद्यालय के विशिष्ट आचार्यों द्वारा संपन्न होता है।
  • विश्वविद्यालय के आदर्श, शिक्षा के साथ विद्या की सार्थकता के लिए यह विभाग प्रतिबद्ध है। इसके पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए सफलता एवं भविष्य के मार्गदर्शन के साथ-साथ आदर्श एवं उत्कृष्टतम् व्यक्तित्व के विकास हेतु व्यावहारिक अध्यात्म पर आधारित रचनात्मक गतिविधियों का शिक्षण-प्रशिक्षण कराया जाता है। इस महत्वपूर्ण कार्य में विश्वविद्यालय के समस्त विभागों एवं आचार्यों की भागीदारी भी सुनिश्चित है जो विद्यार्थियों का सतत् मूल्यांकन एवं मार्गदर्शन कर जीवन प्रबन्धन विभाग के सहभागी अंग के रूप में कार्य करते हैं।

उद्देश्य:-

  • विद्यार्थियों में जीवन के प्रति सही और गहरी समझ पैदा करना।
  • विद्यार्थियों को सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करना तथा इसके सूत्रों का शिक्षण देना।
  • विद्यार्थियों में स्वयं की मौलिकता एक रचनात्मकता की पहचान एवं विकास के व्यावहारिक सूत्रों का शिक्षण।
  • समय प्रबन्धन एवं समायोजन की तकनीकी का विकास करना व्यक्तित्व के विकास में जीवन मूल्यों और आदर्शों का समावेश करना।

Future Vision :

  • To start training workshops aiming at professionals, corporate people, managers and administrators in Personality Refinement, Stress Management and Life Management.
  • To enrich research experience and publication of the department in the unique disciplines of Life Management and Scientific Spirituality to create a knowledge base that could successfully be implemented in any educational institution
  • To start a PG Programme in Philosophy